योगी मंत्रिपरिषद में MY से 2

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आदित्यनाथ योगी सरकार में यादवों को तवज्जो नहीं मिल सकी। जो यादव जाति सरकार ही नहीं प्रशासन के हर स्तर पर छाए हुए थे, उस यादव जाति का महज एक प्रतिनिधि तिहाई बहुमत वाली बीजेपी की योगी सरकार में जगह बना पाया। खास बात ये भी है कि मुसलमानों से भी एक ही व्यक्ति को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है। इससे भी आगे देखें तो दोनोंं में से किसी को भी कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया है। यहांं तक कि स्वतंत्र प्रभार के लिए भी दोनों समुदाय से कोई प्रतिनिधि नहीं मिला।

समाजवादी सरकार का समीकरण MY नयी सरकार के गठन के साथ ही बिल्कुल बिखर गया लगता है। इसके कई मायने लगाए जा रहे हैं। पहला संदेश तो ये है कि अब जाति या धर्म के नाम किसी का तुष्टिकरण नहीं होगा और न ही ये आजादी किसी को मिलेगी कि वो अपना वर्चस्व कायम करे। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुस्लिम और यादव इसे किस रूप में लेंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि उनके साथ भेदभाव होने वाला है? यह आशंका खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही खत्म कर सकते हैं और वो भी सिर्फ बयान से नहीं, काम से।

भ्रष्टाचार, रोमियो स्कवॉयड जैसे मसले पर सरकार का क्या रुख होने वाला है। जो लोग भ्रष्टाचार के सिंडिकेट में थे, उनके साथ क्या सलूक होने वाला है, ये देखने वाली बात होगी। जाहिर है इस पर मुस्लिम और यादव दोनों की नजर है। एक्शन और रीएक्शन दोनों चाहे जो हो, एक बात तय है कि यादवों का स्वर्ण युग खत्म हो गया लगता है। वहीं मुस्लिमों को भी अब अलग किस्म की सियासत के लिए समीकरण का इंतजार रहेगा।

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