मोदी को क्यों भाए योगी

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योगी आदित्यनाथ को यूपी में तीन चौथाई बहुमत का नेतृत्व करने का मौका मिला है। सीएम योगी को दो डिप्टी सीएम भी मिले हैं। एक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे केशव प्रसाद मौर्य हैं और दूसरे हैं बीजेपी में कद्दावर नेता दिनेश शर्मा। वरिष्ठ बीजेपी नेता वेंकैया नायडू ने औपचारिक रूप से युवा नेताओं की ये तिकड़ी यूपी की जनता को बतौर सेवक सौंपा। रविवार दोपहर 2.15 बजे योगी मंत्रिमंडल शपथ लेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस दौरान लखनऊ में मौजूद रहेंगे।
पीएम को भा गयी योगी की हिन्दुत्ववादी फायर ब्रांड छवि
योगी यानी योगी आदित्य नाथ भगवाधारी हैं। फायर ब्रांड साधु और नेता हैं। मंदिर आंदोलनन से योगी जुड़े रहे हैं। उनके बयानों पर अक्सर राजनीतिक विवाद उठते रहे हैं। बावजूद इसके जमीन से जुड़े और जनाधार वाले नेता के रूप में छवि है। महज 26 साल में सांसद बनने वाले योगी आदित्यनाथ की उम्र 44 साल है। हिन्दुत्व से जुड़ा बड़ा चेहरा रहे हैं योगी। कभी कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा।
खुद भी पीएम मोदी की रही है कट्टरवादी हिन्दू नेता की छवि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी हद तक अपनी छवि योगी आदित्यनाथ में देख सकते हैं। गुजरात के सीएम के तौर पर और उसके बाद भी राजनीतिक हमलों के केन्द्र में रहे हैं मोदी। कट्टरवादी नेता की छवि उनकी भी रही। विवाद मोदीजी के भी बयानों पर हुए हैं। जनाधार के मामले में तो कोई सानी ही नहीं है।
गुणों की खान हैं योगी
ईमानदारी, हिन्दुत्व, भ्रष्टाचार रहित, कर्तव्यनिष्ठ और देश के लिए समर्पित जीवन- ये तमाम गुण हैं जो योगी को मोदी के करीब लाता है। यही वो गुण हैं जिनके आधार पर योगी ने सीएम की रेस जीती है।
यूपी अब युवाओं की तिकड़ी के भरोसे
तीन चौथाई बहुमत लेकर के बाद किसी को भी सीएम की कुर्सी पर बिठाया जा सकता था, लेकिन बीजेपी और पीएम मोदी ने ऐसी तिकड़ी चुनी है जो युवा हैं और यूपी की सियासत में सवर्ण और पिछड़ों को जोड़ने की क्षमता रखते हैं। चाहे योगी आदित्यनाथ हों या फिर केशव प्रसाद मौर्य या फिर दिनेश शर्मा- तीनों सुलझे हुए नेता की हैसियत रखते हैं और कम उम्र में ही अपने दम पर राजनीति में मुकाम हासिल करने का गौरव रखते हैं।
जश्न के नाम पर उपद्रव की छूट नहीं- योगी
मुख्यमंत्री बनने से पहले ही जश्न के नाम पर उपद्रव की छूट नहीं देने का निर्देश पुलिस अफसरों को देकर योगी आदित्यनाथ ने संकेत दे दिया है कि सरकार सख्ती से चलने वाली है। जिन लोगों को आशंका है कि योगी आदित्यनाथ अपनी छवि के मुताबिक कट्टरवाद के रास्ते पर चलेगी, वे आशंकाएं इसलिए ज्यादा तवज्जो देने लायक नहीं लगती क्योंकि खुद पीएम मोदी पर कम कट्टरता के आरोप नहीं रहे। बावजूद इसके विकास के लिए समर्पित मोदी जैसा नेता दूसरा नहीं दिखता।
विकासवादी एजेंडे के साथ रहेंगे योगी
योगी आदित्यनाथ से भी उम्मीद की जा रही है कि वे पीएम मोदी के विकासवादी एजेंडे को ही आगे बढ़ाएंगे और किए गये चुनावी वायदों पर अमल करेंगे।
वादा पूरा करने को प्राथमिकता
किसानों की कर्ज माफी, गन्ना किसानों का बकाया मूल्य, सबको घर, हर गांव में बिजली, गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन, दुरुस्त कानून व्यवस्था, पर्यटन और उद्योग धंधों का विकास समेत विकास के कई मसले हैं जिन पर यूपी के नये सीएम का फोकस रहेगा। उन्हें अल्पसंख्यकों की आशंकाओं को भी निर्मूल साबित करने की अलग से चुनौती रहेगी।