रोंदू निकले अखिलेश-राहुल-मायावती

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यूपी चुनाव नतीजे को दो तरीके से देख सकते हैं। एक- ऐसी जीत की कल्पना खुद जीतने को वाले नहीं की थी। दूसरी- ऐसी हार तो न अखिलेश ने सोची होगी, न राहुल ने..और न ही मायावती ने।

समझाने से नहीं बहकाने से मिलता है वोट

अखिलेश ने प्रेस कान्फ्रेन्स में जनता के फैसले का स्वागत ऐसे किया मानो ऐसा करने की परम्परा है। विकास के काम याद दिलाए, तो पीएम मोदी के वायदों का इस तरीके से जिक्र किया मानो वे ठगी कर रहे थे। फिर कह भी डाला…समझाने से वोट नहीं मिलता, बहकाने से मिलता है।

माया बोलीं- ईवीएम में छेड़छाड़, अखिलेश बोले-समझेंगे

मतलब साफ कि अखिलेश ने इस नतीजे को जनता का बहकना माना है। ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ की बात मायावती ने की और उन्होंने तो इस चुनाव नतीजे पर ही सवाल उठा दिए। खुद अखिलेश ने भी इस संभावना को जिन्दा रखा है।

राहुल ने की फिर बचकाना हरकत

राहुल गांधी ने तो हद ही कर दी। जनता के बीच नहीं आए। यूपी को साथ पसंद है- नारा अब हमेशा के लिए मजाक बना गया है। अगर अखिलेश के साथ नहीं भी आए तो अलग से दिल्ली में ही प्रेस कान्फ्रेन्स कर लेते। उनके पास ऐसे भी यूपी में गठबंधन की हार और उत्तरांचल में अपनी पार्टी की हार के साथ-साथ पंजाब में जीत और कहने को बाकी राज्यों में मुकाबले में रहने की वजह थी। पर, राहुल पर यूपी में बीजेपी की जीत का अवसाद छा गया लगता है।

मोदी ने सुधारी राहुल की गलती

राहुल ने ‘श्री नरेंद्र मोदी जी को जीत की शुभकामना’ दी। लेकिन पता है कैसे? उन्होंने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री का ट्विटर हैंडल तक नहीं लिखा। सिर्फ अपने वॉल से शुभकामना दे डाली।

पीएम नरेंद्र मोदी उनकी इस गलती को भी सही करते दिखे। खुद उस ट्वीट को कॉपी किया और लोकतंत्र के दीर्घायु होने की कामना करते हुए रीट्विट कर डाला।

राजनीति में जीत-हार होती रही है लेकिन रोंदू निकले अखिलेश-राहुल-मायावती।

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