सनी लियोनी, राखी, पब्लिक, नेता, मीडिया सबको खुराक बनाया, फिर डकार लेकर बोले राम गोपाल ‘सॉरी’

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पब्लिसिटी के लिए वक्त- महिला दिवस, मौका- महिला दिवस, ऑब्जेक्ट- महिला, कैटेलिस्ट- सनी लियोन, टारगेट प्रोवोकेशन- वो पब्लिक जो खुद पब्लिसिटी चाहती है, गुदगुदी- मीडिया को हो, कोशिश- ऑब्जेक रिएक्ट कर दे…और ये सबकुछ हो गया तो नयी नौटंकी माफी की ताकि बात से बात निकले, स्टोरी तुरंत खत्म ना हो जाए, असर तुरंत बेअसर ना हो। माफी भी ऐसी जिसमें शब्द ‘माफी’ का हो, भाव शर्म का। यानी कि पूरा मसाला है रामगोपाल वर्मा की इनीशिएटिव में। तो, बात शुरू करते हैं राम गोपाल की माफी से ही, जो उन्होंने कुछ घंटे पहले मांगी है।

राम गोपाल वर्मा ने मांग ली माफी। लेकिन कोई पूछे किस बात की माफी, किस बात का पश्चाताप? तो शायद राम गोपाल वर्मा मुस्कुराते नज़र आएं। ‘सबकुछ पब्लिसिटी के लिए’ करने वाले राम गोपाल वर्मा ने महिला दिवस पर जो कुछ कहा, उसके लिए वो माफी नहीं माग रहे हैं, ये कहते हुए उन्होंने माफी मांगी है। वाह वर्माजी वाह, माफी मांगने की अदा तो कोई उनसे सीखे।

सनी लियोनी ने रामगोपाल वर्मा को करारा जवाब दिया है। करारा का मतलब ये कतई नहीं है कि रामगोपाल वर्मा ने जिस स्तर की भाषा, जिस स्तर का विचार और जिस विकृत पुरुषवादी मनोग्रंथि का प्रदर्शन किया था, उस पर कोई ईंट का जवाब पत्थर वाला अपनाया हो। ट्विटर पर लियोनी का जवाब लाजवाब है। इस जवाब में में विद्वता है, एकजुट होने की अपील है, प्रेम और शांति का संदेश है। इन भीगी भावनाओं के साथ करारा यही है कि बदलाव तभी आता है जब हम एक आवाज में बोलते हैं। इसलिए उठें। अपने शब्दों का बुद्धिमत्तापूर्ण इस्तेमाल करें।

हालांकि ऐसा लिखते समय भी ये खतरा है कि ‘गंदे विचार’ को कोई रूढ़िवादी बताकर बहस छेड़ने की कोशिश करे या फिर राम गोपाल वर्मा का समर्थन करने लग जाए। प्रचार से प्रचार पाने का तरीका भी तो वॉलीवुड में आम है। बात अगर राखी सावंत की करें, तो उनके पास तो प्रचार के लिए सनी लियोनी का नाम ही नहीं, राम गोपाल वर्मा का ‘मसाला’ भी था। लिहाजा, राखी ने इस मसाले का स्वाद लेने की सलाह देते हुए इसे बॉलीवुड की भाषा में कहें तो एन्डोर्स कर दिया।

सनी लियोनी के बहाने रामगोपाल वर्मा और इन दोनों के बहाने राखी सावंत सस्ती लोकप्रियता लूटने की होड़ दिखा रहे थे, लेकिन समाजसेवी को भी प्राण तो ऐसे ही मौके पर मिलात है। लिहाजा एफआईआर दर्ज कराते हुए विशाखा म्हाम्ब्रे सक्रिय हो गयीं। अगर इस कड़ी में मीडिया का नाम नहीं लिया जाए, तो पक्षपात का आरोप स्वत: लग जाएगा।

इस बीच मुम्बईकर नेतागण भी सस्ती लोकप्रियता को प्रमोट करने में जुट गये। बहती गंगा में लोटा भर जल लेने की कोशिश होने लगी। ट्विटर पर भी जूतामार हैशटैग चला। ये अभियान रामगोपाल और उनकी समर्थक जमात के खिलाफ भावनाओं को एनकैश करने के लिए था। लोग माफी मांगने की मांग करने लगे। एनसीपी एमएलए ने तो खुलेआम चप्पल से पिटाई की धमकी तक दे डाली।

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