क्या अखिलेश हार रहे हैं चुनाव? माताजी के तेवर ने उठाए सवाल

अखिलेश को घर में ही घेर रहे हैं अमर !

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क्या अखिलेश चुनाव हार रहे हैं? राजनीतिक दावे तो विरोधी करते ही हैं, उनकी बातें छोड़ दीजिए। क्या कोई चुनाव पूर्व सर्वेक्षण ऐसा कह रहा है। उसकी भी परवाह नहीं कीजिए, क्योंकि चुनाव पूर्व सर्वेक्षण कई बार फेल हुए हैं। तो क्या कोई एक्जिट पोल का नतीजा है यह? 9 मार्च से पहले एक्जिट पोल भी नहीं आ सकता। फिर ये सवाल कैसे और क्यों उठा कि अखिलेश चुनाव हार रहे हैं?

अखिलेश यादव की माताजी के तेवर ने ये सवाल जिन्दा कर दिया है। लेकिन वो खुद तो अखिलेश की जीत की कामना कर रही हैं! दरअसल अखिलेश की माताजी साधना यादव ने कई सवाल चुनाव खत्म होने से पहले उठाए हैं जो चुनाव नतीजे के बाद तब बड़े संघर्ष की पृष्ठभूमि हो सकती है अगर अखिलेश हार जाएं।

साधना ने खुलकर नाराज़गी का किया इजहार

  • पूरे घटनाक्रम में मेरा अपमान हुआ।
  • शिवपाल को पार्टी से दरकिनार करना गलत
  • मैंने परिवार में झगड़ा नहीं कराया
  • अब जो होगा खुलकर होगा, पीछे नहीं हटूंगी
  • दुष्ट लोगों ने मेरे घर को बर्बाद किया
  • मुझे पता नहीं अखिलेश को किसने गुमराह किया
  • चाहे कुछ भी हो जाए, नेताजी का असम्मान नहीं करना चाहिए था। उन्होंने ही पार्टी की स्थापना की और उसे सींचा।
  • हमें नेताजी ने नहीं आने दिया, पर हम बैकग्राउंड में रहकर काम करते रहे। अब मैं राजनीति में नहीं आना चाहती, पर मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा प्रतीक राजनीति में आए। मैं प्रतीक को सांसद बनते देखना चाहती हूं।

साधना यादव ने नाराजगी का जिस तरह से खुलकर इजहार किया है उससे लगता है कि उन्होंने ये मान लिया है कि अखिलेश चुनाव हारने जा रहे हैं। अगर जीत रहे होते तो शायद अब तक चुप रही साधना मुंह नहीं खोलतीं, लेकिन लगता है उन्होंने भी हार के बाद के दिनों के लिए कमर कस ली है। भारतीय समाज का समाजशास्त्र और झगड़े का मनोविज्ञान समझने वाले ये मान रहे हैं कि खुद अखिलेश परिवार के लोगों ने मान लिया है कि उनकी हार होने वाली है। इसलिए झगड़ा अब तूल पकड़ता दिख रहा है।

वैसे कई लोग ऐसे भी हैं कि साधना गुप्ता के बयान के पीछे असली किरदार अमर सिंह को मान रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि जब मुलायम सिंह ने अखिलेश के खिलाफ बोलने से मना कर दिया, तो अब ये आखिरी हमला साधना के जरिए कराया जा रहा है।

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