असहिष्णु भारतीयों के लिए भारत में जगह नहीं- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रपति ने छात्रों को सार्थक बहस के लिए आगे आने को कहा

0
119

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कोच्चि में सख्त भाषा में कैम्पस की सियासत पर हमला बोला। राष्ट्रपति ने कहा कि अशांति की संस्कृति छात्रों को छोड़नी होगी। इसके बजाए छात्रों और शिक्षकों को चर्चा एवं बहस में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि असहिष्णु भारतीय के लिए भारत में कोई जगह नहीं है। रामजस कॉलेज में कथित अभिव्यक्ति की आजादी और गुरमेहर के बयान पर छिड़ी सियासत के बीच राष्ट्रपति के भाषण को इस मामले में हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं अब इस भाषण के भी अलग-अलग मतलब लगाए जाने लगे हैं। मसलन असहिष्णु भारतीय कौन? छात्रों का कौन सा धड़ा राष्ट्रपति के भाषण के अनुरूप देश में रहने का हक नहीं रखता।

कोच्ची में श्री मुखर्जी ने छठा केएस राजामणि स्मारक आख्यान देते हुए कहा कि छात्रों को अशांति और हिंसा के भंवर में फंसे देखना दुखद है। राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन कालसे ही स्वतंत्रविचार, अभिव्यक्ति और भाषण का गढ़ रहा है। हमारे संविधान ने भी इसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया है। उन्होंने वैध आलोचना और असहमति के लिए जगह रखने की भी हिमायत की।

वहीं कुछ लोगों को ऐसा भी लगा कि राष्ट्रपति को भी अब उनके बयान के बाद विवाद में घसीटने की कोशिश शुरू हो गयी है।

राष्ट्रपति ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि “जब हम किसी महिला के साथ बर्बर आचरण करते हैं तो हम अपनी सभ्‍यता की आत्मा को घायल करते हैं. न सिर्फ हमारा संविधान महिलाओं का समान अधिकार प्रदान करता है बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा में भी नारियों को देवी माना जाता है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि जो लोग हिंसा फैलाते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि बुद्ध, अशोक और अकबर इतिहास में नायकों के रूप में याद किए जाते हैं न कि हिटलर और चंगेज खान।

लिखें अपने विचार