युद्ध का विरोध करते-करते युद्ध का मैदान बन गयीं ‘शहीद की बेटी’ गुरमेहर

वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली ने भी खेला गुरमेहर को 'पुल शॉट'

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गुरमेहर खुद विषय बन गयी। विचार बन गयी। सवाल और जवाब बन गयी। मोहरा और हथियार बन गयी। उसका अतीत, उसका वर्तमान, उस पर बहस, उस पर राजनीति। कभी पापा की शहादत को युद्ध का नतीजा माना, युद्ध का विरोध किया। आज अभिव्यक्ति की आजादी तक पहुंचते-पहुंचते गुरमेहर खुद युद्ध का मैदान बन गयी।

 

जो पोस्ट गुरमेहर ने बहुत पहले डाला था, उसे वीरेंद्र सहवाग के पोस्ट ने बड़ी खबर बना दिया। गुरमेहर का पोस्ट अनुत्तरित सवाल था- “मेरे पापा को पाकिस्तान ने नहीं, युद्ध ने मारा।“ इस पोस्ट में युद्ध का विरोध था। वीरेंद्र सहवाग के पोस्ट- “दो ट्रिपल सेंचुरी मैंने नहीं बनायी, बल्ले ने बनायी है।”- ने गुरमेहर को गुनहगार बना डाला। सच नहीं बोलने का गुनहगार। सच छिपाने का गुनहगार। विराट कोहली ने भी मानो नहले पर दहला दे मारा।

युद्ध का विरोध, पर युद्ध में शहीद होना गौरव का विषय?

करगिल युद्ध के शहीद मनदीप की बेटी गुरमेहर युद्ध में शहादत को देशभक्ति मानती है लेकिन युद्ध का समर्थन करने को देशभक्ति नहीं मानती। पर, वीरेंद्र सहवाग का कहना साफ है। जिस युद्ध में मरना शहादत है, उस युद्ध का विरोध देशभक्ति नहीं है। कमोबेश डीयू के रामजस कॉलेज में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर लड़ रहीं विचारधाराएं इस मसले पर इन्हों दो पाटों में बंटी हैं। अब गुरमेहर यहां तक कह रही हैं कि लोग चाहें तो उन्हें शहीद की बेटी ना भी कहें।

Don’t call me a Martyrs daughter if that bothers you. I never claimed anything otherwise. You can call me Gurmehar.
जेएनयू का आतंक पहुंचा डीयू, तो शुरू हो गया राजनीतिक विरोध 
जिन छात्र नेताओं पर देश के विरोध में नारे लगाने के आरोप लगे। कश्मीर मांगे आजादी, भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारों के बीच जिन छात्रों ने मीडिया में जगह बनायी थी उन्हें डीयू में बुलाना उन्माद फैलाने की साजिश थी- ऐसा एबीवीपी के लोग मानते हैं। एबीवीपी ने इस मौके को विचारधारा की लड़ाई के तौर पर लिया। विरोध किया। विरोध संघर्ष में बदल गया। पुलिस अपने स्वभाव के अनुरूप घटना होने देने तक शांत रही।
वहीं संबित पात्रा कहते हैं कि खबर में आने के और भी तरीके हैं। वे रामजस कॉलेज में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश विरोधी बात करने वालों के विरोध की घटना को सही ठहराते हैं। कहते हैं कि देश और सेना के खिलाफ हम कुछ भी नहीं सहेंगे।

गुरमेहर ने दिया ‘अभिव्यक्ति की आजादी के दीवानों’ का साथ
इसलिए अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकारों को भी विचाराधारात्मक लड़ाई का मौका मिल गया। गुरमेहर अब तक और परिपक्व हो चुकी थी। उसकी राजनीतिक लाइन भी एबीवीपी और बीजेपी के खिलाफ रही है। उसने अपनी आवाज़ बुलन्द कर दी।
निकल आए गुरमेहर के पुराने ट्वीट्स
फिर क्या था। गुरमेहर के पुराने ट्वीट्स निकल आए। सेहवाग निकल आए। गुरमेहर के पक्ष और विपक्ष में सेना सजकर तैयार हो गयी। युद्ध का विरोध कर रही गुरमेहर खुद युद्ध का कारण बन चुकी थी।
किरण रिजिजू को भी गुरमेहर ने दिया जवाब
किरण रिजिजू ने कहा था कि कैम्पस को देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने ये जानना चाहा था कि कौन इस बच्ची (मेहरार) के दिमाग में गंदे विचार भर रहा है। गुरमेहर ने जवाब दिया कि वो खुद इसके लिए जिम्मेदार है और जो वह कह या कर रही है सोच समझ के साथ कह या कर रही है।
गुरमेहर को भी मिला कांग्रेस और वामदलों का खुला समर्थन
गुरमेहर के पक्ष में वामदल और कांग्रेस ही नहीं कई पत्रकार भी खुलकर सामने आए और उनकी इस बात के लिए हौसला अफजाई की कि गुरमेहर अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई लड़ रही हैं।

लेकिन बरखा दत्त गुरमेहर कौर की पीठ थपथपाती दिख रही हैं।

गुरमेहर सवाल उठाती हैं कि क्या रेप की धमकी देना, छात्रों पर पत्थरबाजी करना ही देशभक्ति है?

वीरेंद्र सेहवाग रेप के आरोप को पब्लिसिटी स्टंट के रूप में देखते हैं। वे सवाल करते हैं कि अगर एबीवीपी के गुंडे ऐसी धमकी देते हैं तो गुरमेहर को पुलिस के पास जाना चाहिए न कि एनडीटीवी के पास?

ऋचा अनिरुद्ध जैसे लोग भी हैं जो इस बात से दुःखी हैं कि विचारधाराओं में बंटे लोग अब रेप की धमकी का भी समर्थन करने लगे हैं।

इंडिया टुडे गुरमेहर कौर से जुड़े दो वाकयों को अहमियत देता है। एक कि बीजेपी सांसद ने गुरमेहर की तुलना दाउद इब्राहिम से की। और, दूसरा किरण रिजिजू जानना चाहते हैं कि कौन गुरमेहर के दिमाग में जहर खोल रहा है?

गुरमेहर के पुराने ट्वीट्स को देखें तो उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी टिप्पणियां की हैं। उन्हें युद्ध का जिम्मेदार माना है। उसकी टिप्पणी छोटी मगर भूचाल लाने वाला दिखता है- चाय बनाओ युद्ध नहीं।

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