जीव से शिव तक सफर ही योग है- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने 112 फीट ऊंची आदि योगी शिव की मूर्ति का अनावरण किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाशिवरात्रि के मौके पर ईशा योग केंद्र में  शिव की 112 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। प्रतिमा का अनावरण करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीव से शिव तक का सफर ही योग है। आदियोगी शिव को विविधताओं के बावजूद हर जीव-जन्तु-पौधों को आश्रय देने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि यही विवधता हमारी संस्कृति है जो हजारों सालों से चलती आयी है। इसे ही हमें बढ़ाना है।
आदि योगी शिव की 112 फीट ऊंची मूर्ति का प्रधानमंत्री ने अनावरण किया, इस दौरान हजारों लोग मौजूद रहे

महाशिवरात्रि, महादेव और महामृत्युंज बताती है शिव की महिमा

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जगदगुरु जग्गी वासेदुव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाशिवरात्रि के मौके पर यहां होना मेरे लिए गर्व की बात है। देश में कई त्योहार हैं, लेकिन ये इकलौता त्योहार है जिसमें ‘महा’ लगा हुआ है। कई देवता हैं लेकिन केवल एक हैं ‘महा’देव। इसी तरह मंत्र भी कई हैं लेकिन वो मंत्र जिससे भगवान शिव की पहचान होती है, वो है ‘महा’मृत्युंजय मंत्र। श्री मोदी ने कहा-“ये शिव की महिमा है।“

पीएम ने कहा कि महाशिवरात्रि का त्योहार अंधेरे से उजाले की ओर ले जाता है, अन्याय से हमें उबारता है। हममें साहस पैदा करता है कि हम अच्छाई के लिए लड़ें। महाशिवरात्रि का उत्सव रात भर चलता है। ये उत्सव हमें प्रकृति और वातावरण के लिए काम सजग रहने को प्रेरित करता है।

आज दुनिया में योग की चर्चा

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज योग पर दुनिया भर में चर्चा हो रही है। कई परिभाषाएं हैं। इसके कई प्रकार हैं। दुनिया भर में कई तरह के योग से जुड़े विद्यालय हैं। अलग-अलग अभ्यास के तरीके हैं। यही योग का सौन्दर्य है। योग प्राचीन है, सतत है, हमेशा नयी ऊर्जा पैदा करता रहता है।

श्री मोदी ने योग को बचाने की जरूरत बतलायी और कहा- “अन्यथा हमें फिर से इसे योग को खोजना होगा, पता लगाना होगा। योग को पाने, बचाने और आगे बढ़ाने की जरूरत है।“

जीव से शिव की यात्रा ही योग है

ध्यानलिंगा में प्रधानमंत्री परिक्रमा करने से पहले आरती उतारते। साथ में हैं सद्गुरु जग्गी वासुदेव।

पीएम ने योग को उत्प्रेरक बताया। उन्होंने कहा- “योग जीव से शिव का रूपांतरण है।“ कहते हैं यत्र जीव तत्र शिवम्। जहां जीव है वहीं शिव हैं। जीव से शिव की यात्रा- यही तो योग है। योग का अभ्यास करने से किसी क्षमता आती है, ऊर्जा आती है। मन स्वस्थ होता है, शरीर एकरूप होता है।“

योग की यात्रा Me से We तक

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे परिवार और समाज में जहां हम रहते हैं वहां दुनिया के सभी पक्षी और पौधे भी साथ रहते हैं। श्री मोदी ने कहा- “योग यात्रा है ME से WE तक। ये यात्रा है व्यक्ति से समष्टि तक। ये यात्रा है अहम से वयम् तक। यही योग है। भारत जैसी विविधता कहीं नहीं है। इसे सुना, समझा और महसूस किया जा सकता है। इस विविधता का स्वाद लिया जा सकता है, आनन्द लिया जा सकता है।“

हिमालय से सागर का सम्मिलन हैं शिव-पार्वती

पीएम ने कहा कि भगवान शिव के बारे में सोचते ही जो तस्वीर सामने आती है वो है महान हिमालय के शिखर पर कैलाश पर्वत। पार्वती का जिक्र आते ही कन्या कुमारी के महासागर का आभास होता है। हिमालय का सागर के साथ सम्मिलन- सृष्टि की कितनी बड़ी परिघटना है। ये एकता का संदेश है।

परस्पर वैरी भी सौहार्द से जीते हैं शिव परिवार में

ध्यानलिंगा में मंत्रोच्चार के बीच आसन लगाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री ने शिव के चारों ओर जो वातावरण है उसे महसूस करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिवजी के गले में नाग रहते हैं, भगवान गणेश की सवारी चूहा हैं। दोनों में दुश्मनी का रिश्ता है। फिर भी वे एक साथ रहते हैं। श्री मोदी ने आगे कहा- “इसी तरह कार्तिकेय का वाहन मोर है जिसकी दुश्मनी सांप से रहती है। फिर भी वे साथ रहते हैं। विविधताओं के बावजूद इस जगत में शिव का पूरा परिवार सौहार्द के साथ रहता है।“

विविधता संघर्ष का कारण नहीं

श्री मोदी ने कहा कि विविधता हमारे लिए संघर्ष की वजह नहीं है। हम इसे दिल से स्वीकार करते हैं। यह हमारी संस्कृति की विशेषता है। जहां कहीं भी देवी-देवता हैं, वहां या तो पशु-पक्षी हैं या फिर पेड़-पौधे। सभी आपस में जुड़े हुए हैं। ये पेड़-पौधे भी उसी भावना के साथ ईश्वर से जुड़े हैं।

जीवन के प्राचीन मूल्यों ने ही हमें जिन्दा रखा है

जीवन जीने का इससे बेहतर और कोई तरीका नही हो सकता। प्रकृति दुनिया के समान है। प्रधानमंत्री ने कहा -“आपसी सौहार्द, भाईचारा और दयालु स्वभाव हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। हमारे प्राचीन जीवन में जो मूल्य हैं, ये वो गुण हैं जिसने भारतीय सभ्यता को हजारों सालों से बचा रखा है।“ उन्होंने कहा कि हमारा मन हमेशा नयी सोच और विचार का हमेशा से स्वागत करता आया है। हम सबको साथ लेकर जीते आये हैं। दुर्भाग्य से इसी धरती पर ऐसे लोग हैं जो नये विचारों का स्वागत नहीं करते, कोई भी बदलाव मंजूर नहीं करते। हमारी ऐसी संस्कृति नहीं है।

प्राचीन कहकर विचार को खारिज करना खतरनाक

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि किसी विचार को ये कहकर खारिज कर देना कि ये प्राचीन है, हानिकारक हो सकता है। श्री मोदी ने कहा, “यह जरूरी है कि हम उसका विश्लेषण करें, उसे समझें और नयी पीढ़ी को इस तरीके से बढाएं कि वो इसे और बेहतर तरीके से समझ सकें।“

महिलाओं के सशक्तिकरण से ही होगा मानवता का विकास

श्री मोदी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है। मसला मानव विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि मसला है महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास। हमारी संस्कति में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है। हमारी संस्कृति में कई देवियां हैं जिन्हें केंद्र में रखते हुए सामाजिक तानाबाना है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत की भूमि भी ऐसी है जहां एक से बढ़कर एक महिलाओं ने नेतृत्व किया है और सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक बदलाव लाए हैं।

नारी तू नारायणी

प्रधानमंत्री ने ये कहते हुए सबको महिलाओं की अहमियत की ओर सबका ध्यान दिलाया कि आपको जानने में दिलचस्पी होगी कि भारत जहां कहा जाता है नारी तू नारायणी। वहीं आदमी के लिए कहा जाता है- नर तू करणी करे तो नारायण हो जाए। श्री मोदी ने पूछा- “क्या आप इस फर्क को महसूस करते हैं? महिलाओं के लिए देवी का स्थान बिना शर्त है। लेकिन नर के लिए नारायण होना सशर्त है।“ मां का रुतबा भी देवी का होता है जो बिना शर्त जीवित रहती है।
दुनिया में शांति की जरूरत बढ़ी

श्री मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया शांति चाहती है। संघर्ष भी बढ़ रहा है, लेकिन शान्ति की जरूरत और चाहत ज्यादा है। जो तनाव है उससे मुक्ति का धारदार उपाय अगर कुछ है तो वो है योग।

तनाव दूर करता है योग

प्रधानमंत्री ने कहा कि योग के अभ्यास से तनाव दूर होता है। अगर शरीर मंदिर है, योग मंदिर को सुन्दर बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि योगा पासपोर्ट है। यह स्वास्थ्य का निशुल्क बीमा है। योग स्वास्थ्य का पर्याय है। योग रोग मुक्ति है। योग भोक मुक्ति भी है। योग व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाता है कार्य में, ज्ञान में, समर्पण में।

शारीरिक अभ्यास से ऊपर हैं योगी

पीएम ने कहा कि योग को अगर सिर्फ शारीरिक अभ्यास भी मानें, तो भी यह इंसान का जीवन बदलने की क्षमता रखता है। लेकिन शारीरिक अभ्यास करने वाले योगी नहीं हैं। योगी इससे आगे हैं। जो नया युग बनाए, एकजुटता और सौहार्द लाए- वह योगी है।

दुनिया में योग का स्वागत

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का विचार का दुनिया में खुले दिल से स्वागत किया गया था। दुनिया ने 21 जून 2015 और 16 को योग दिवस मनाया। कोरिया और कनाडा, स्वीडन, साऊथ अफ्रीका हर जगह सूर्य की किरणों के साथ ही योग का अभ्यास शुरू हो गया।

मानव कल्याण के लिए साधना है योग

प्रधानमंत्री ने योग को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि योग नये युग में ले जाता है। मानवता के कल्याण के लिए योग साधना है। सही मायने में जो अगम काम सद्गुरू ने किया है वो ये कि उन्होंने आम आदमी को योगी बनाया है। आमलोग, जो अपने परिवार के साथ रहते हैं, जीवन के लिए काम करते हैं। उनके दैनिक रूप में योग के जरिए उन्होंने खुबसूरती पैदा की है।

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