जब मोदी बोले – हां, मैं गधा हूं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मान लिया है कि वो गधा हैं। पर गधा कहे जाने पर अखिलेश यादव से आपत्ति भी जताई है कि उनकी लड़ाई तो मोदी से है। वो चाहें उनकी जितनी आलोचना कर लें, बीजेपी पर हमला कर लें; लेकिन बेचारे गधे को तो बख्श देते। यूपी विधानसभा चुनाव में पांचवें चरण के लिए वोट मांगते हुए प्रधानमंत्री ने बहराइच और बस्ती में अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा गधों पर शुरू हुए वाद-विवाद पर केंद्रित कर दिया।

देश के सवा सौ करोड़ लोगों को अपना मालिक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गधा अपने मालिक के हुक्म का गुलाम होता है और वो भी हैं। पीएम मोदी ने कहा- “ये सवा करोड़ देशवासी मेरे मालिक हैं। वो मुझसे जितना काम लेते हैं, मैं करता हूं। बिना छुट्टी लिए करता हूं। थक जाऊं, तो भी करता हूं। कभी भूखा रहा, तो भी करता हूं क्योंकि गधे से प्रेरणा लेता हूं।”

गुजराती गधे पर निशाना साधने पर पीएम मोदी ने कहा कि अखिलेशजी को अब उन गधों से भी डर लगने लगा है जो सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं। उन्होंने कहा कि वो हैरान हैं कि अखिलेशजी की जातिवादी मानसिकता, ऊंच-नीच का भाव देखने वाली मानसिकता ऐसी है कि वो पशु में भी ऊंच-नीच का भाव देखने लगे हैं।

देश के सवा सौ करोड़ लोगों को अपना मालिक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गधा अपने मालिक के हुक्म का गुलाम होता है और वो भी हैं। उन्होंने कहा- “ये सवा करोड़ देशवासी मेरे मालिक हैं। वो मुझसे जितना काम लेते हैं, मैं करता हूं। बिना छुट्टी लिए करता हूं। थक जाऊं, तो भी करता हूं। कभी भूखा रहा, तो भी करता हूं क्योंकि गधे से प्रेरणा लेता हूं।”

प्रधानमंत्री ने बस्ती के कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की गधे पर लिखी कविता भी पढ़ी और कहा कि इससे वे पूरी तरह सहमत हैं-

नेता के दो टोपी, और गधे के दो कान
टोपी अदल-बदल कर पहने, गधा था हैरान!
एक रोज गधे ने उनको तंग गली में छेंका
कई दुलत्ती झाड़ी उन पर, और जोर से रेंका
नेता उड़ गये, टोपी उड़ गयी, उड़ गये उनके कान
बीच सभा में खड़ा हो गया गधा सीना तान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गधे के बहाने प्रतीकात्मक शैली में भेदभाव की राजनीति पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा – “गधा ये नहीं देखता कि उसकी पीठ पर चीनी है या चूना। चीनी हो तो ज्यादा चलना, चूना हो तो नहीं चलना। ये गधे का स्वभाव नहीं होता।“ प्रधानमंत्री ने कहा कि ये तो उन लोगों का काम होता है जो भ्रष्टाचार में डूबे होते हैं। किस रंग की नोट आयी है, उस रंग का काम करता है।

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से पूछा कि “अखिलेशजी, गुजरात के गधों से आपको इतनी नफरत है लेकिन ये वही गुजरात है जिसने दयाननन्द सरस्वती, महात्मा गांधी, सरदार बल्लभ भाई पटेल को जन्म दिया था। उन्होंने कहा- “ये वही गुजरात है जहां भगवान कृष्ण ने उत्तर प्रदेश से जाकर वहां बसना पसंद किया था। इसलिए ये देश हमारा है, हर कोना हमारा है। आपको नफरत का भाव शोभा नहीं देता।”

प्रधानमंत्री ने सीएम अखिलेश को याद दिलाया कि जिसे उन्होंने विधानसभा चुनाव में गले लगाया है वो पहले ही केंद्र में यूपीए सरकार के रहते उन्हीं गधों पर डाक टिकट जारी कर चुके हैं। श्री मोदी ने कहा- “यूपीए सरकार ने इन्हीं गधों का डाक टिकट निकाला था। अखिलेशजी, वो गधा कितना होनहार होगा, वो गधा कितना महत्वपूर्ण होगा, अब आपको समझ में आ गया होगा।“

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